सहजयोग आज का महायोग

कल्कि अवतार और कुंडली के बीच में संबंध (श्री माताजी के शब्दों में) :- 

आज हम कल्कि और कुण्डलिनी के बीच सम्बन्ध के बारे में चर्चा करेंगे कल्कि शब्द निष्कलंक से लिया गया है। जिसका अर्थ है निर्मल बिना किसी दाग के। कई पुरानो में कल्कि अवतार के बारे में बताया गया है। की वह सफ़ेद घोड़े पर धरती पर आएगा। सम्भल्पुर गाव् में। संभाल का अर्थ है भाल यानि की जो हमारे माथे पर् स्थित है। यही पर वो जन्म लेगा। ( मनुष्‍य का सहस्रार) यही सम्भाल्पुर का अर्थ है। यही पर जिसस क्राइस्ट और महा विष्णु की अपार शक्तियाँ भी है।
यही वो समय है  जब मनुष्‍य को अपने आपको सुधरने का वक़्त दिया गया है। कि वह अपने आप को इस योग्य बनाए की वह परमात्मा के साम्रज्य में प्रवेश कर सके । वाइबल् में इसे
Last judgement कहा गया है। इस समय जनसंख्या सबसे अधिक है क्योकि इस समय उन सभी ने जन्म लिया है जो परमात्मा के साम्राज्य में प्रवेश पाना चाहते है। यह बहुत महत्वपूर्ण समय है क्योकि सहजयोग ही L
ast judgementहै। यह सत्य है। (जिसका वर्णन सभी ग्रंथों में है)
माँ के प्यार की वजह से आत्मसाक्षात्कार इतना सरल हो गया। इसको आपके लिए इतना आसान माँ ने बना दिया कि कोई भी परेशानी आपको नहीं सहनी पड़ी। (जिस प्रकार आप को जन्म देते समय सभी परेशानी मां उठाती है)
पर ये
L
ast judgement  है यही सहजयोग में आपका निर्णय होने वाला है कि आपको परमात्मा के राज्य में जगह मिलेगी या सहजयोग में हर प्रकार् के चित् वाले लोग आते है। जिनमे से कोई तामसी प्रवत्ति के होते हैं। तो कुछ बहुत ज्यादा right sided  होते है। दोनों ही प्रकार के लोग सहजयोग के लिए ठीक नहीं है। पर जो लोग बीचो बीच है वो सहजयोग को सरल तरीके  से पकड़ लेते है ।
शहर के बजाय गाँव में लोग ज्यादा समझते हैं सहजयोग को।
पर जब हम कल्कि की बात करते है हमें याद रखना चाहिए कि हमारे आत्मसाक्षात्कार एवं परमात्मा के साम्राज्य के बीच हम गिर भी सकते हैं ।जिसे योग्भ्रस्तस्थिति कहा जाता है।ईगो
ego oriented  लोग अपना एक अलग ग्रुप बना लेते है और फिर वो अपाने योग से नीचे गिर जाते है। क्योंकि सहजयोगा में आपको पूरी स्वतंत्रता है आप चाहो तो ऊपर उठो और चाहो तो नीचे गिरो। आप में से कुछ्  ऐसे गुरुओ के पास चलें जाते है जहां आपका कनेक्शन मेन से टूट जाता है। पर आपको यह ध्यान रखना है आप किसी से भी dominant ना हो और सिर्फ मेन से विराट से जुड़े रहे। सजहयोग में जो बहुत उपर उठने की कोशिश करता  है वह नीचे भी गिर जाता है। क्योकि आप एक सीमा से पार नही जा सकते। पेड़ भी एक ही उचाइ तक बढ़ता है उसकी भी अपनी एक सीमा है। 
सब कुछ नियंत्रित है। आप दिखावा करने की कोशिश ना करें। 

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