सहजयोग परमात्मा द्वारा मानव को दिया वो आशीर्वाद है जो जन्मो से हमारे अंदर ही है, जिस का वर्णन हर ग्रंथ मे किया गया है। यह पैथी बहुत पुरानी है जो कुछ धर्म के अनुयायी  तथा  कुछ मठा दिशो द्वारा   लुपत् कर दी गयी थी, । कुंडलनी जागरण का जिकर हर धर्म मे किया गया है जो बहुत तप करने से एक या दो लोगो को दिया जाता था। पर अब परम पूजय माता जी श्री निर्मला देवी द्वारा कलयुग मे हजारो लाखो लोगो को कुंडलनी जागरण घर बैठ कर बड़ी आसानी से मिल रहा है। अब सतयुग चल रहा है सत्य की जीत होगी असत्य की हार होगी। सहजयोग अपनाने  से शारीरिक , मानसिक तथा आर्थिक लाभ , लाखों लोगों को हुए हैं

 

सहज योग के लाभ कुछ इस प्रकार है  :-

* हमारे मानसिक,शारीरिक, आर्थिक, भावनात्मक, आध्यात्मिक, सामाजिक  उत्थान में मदद करना
* तनाव एवम् डिप्रेशन को दूर करना।
* साइकोसोमेटिक बीमारियों का इलाज।

* पढ़ाई में एकाग्रता,

* स्मरण शक्ति का बढ़ना।
* नशा व बुरी आदतों से छुटकारा पाना।

*  प्रदूषण से छुटकारा।

* प्राकृतिक आपदाओं से बचाव।
* ग्लोबल वार्मिन्ग पर रोक।

* आत्मविश्वास का विकास।

* भारतीय संस्कृति का अमल।
* राष्ट्रीय संबंधो में सुधार।
* अमन और शांति की स्थापना।
* अर्थव्यवस्था का विकास।

* महामारीओ से बचाव।
* भ्रस्ट राजनीति का अंत।
* तान्त्रिक मान्त्रिक विद्या एवं कुगुरूओ का अंत।
* सुद्रढ समाज का विकास। * सही और गलत की पहचान कराना। 

* युवा पीढ़ी के सही मर्ग्दशन देना।

सहजयोग अपनाने से सब से पहले आप  स्वस्थ होंगे आप जो भी दवाई खाते है वो सब से पहले कम हो जाए गी। जैसे -जैसे आप के चक्र  साफ होंगे और संतुलन होंगे अपनेआप सभी समस्या ख़तम  हो जाएगी।

सहजयोग  से मानव मे चेतना आ जाती है मानव मैं सोचनें समझने की शक्ति बड़ जाती है। वो सभी फैसले सोच समझ कर लेता है। वो किसी भी काम को करने मै घबराता नही है। 
खेती-बाड़ी मे  सहजयोग बहुत कारगर है फसल अच्छी होने लगती है। जैसे -जैसेमानव की चेतना बढ़ती जाती है उसी प्रकार खेती में भी अपने आप उन्नति होने लगती है । 

शराबी की शराब छुङवा सकते हैं  कोई भी मादक चीज लेने से हमारी चेतना खराब होती है ,अगर संतुलन नही आया तो कुण्डलिनी कैसे जागृत हो सकती है इस संतुलन को पाने के लिए सहजयोग लाभप्रद है क्योंकि सहजयोग मे आने के बाद मनुष्य मे 10 धर्म स्थापित हो जाते हैं फिर वो शराब नही पी सकता ।
 

सहजयोग सब धर्मों का आदर करता है सहजयोग मे सब धर्मों का तत्व एक ही है ,सहजयोग मे आने के बाद हम सब एक ही विश्व निर्मल धर्म को मानने लग जाते है ,यही समझ की बात है,सब अवतरणो का मान करना ये सब कहने से नही होता ,समझाने से नही होता ,ये आत्मा के प्रकाश में अंदर बैठ जाता है और सहजयोग मे आने पर आत्मा का प्रकाश आ जाता है, हर इंसान अंदर से सभी धर्मों का आदर करने लग जाता है ।
जैसे कि हिंदुओं मे बताया गया है सब मे एक ही आत्मा का वास है


सहजयोग मे शुद्ध ज्ञान मिलता है जिससे कि हम असली व नकली गुरू की पहचान कर सकते हैं 
कोई आपको एक हीरा निकाल कर दे दे तो बस वो आपके महागुरू हो गए इस तरह की गलत चीजों के पीछे इंसान दौड़ता ही रहता है ।
दूसरे तरह के वे लोग होते हैं जो चमत्कार दिखाते हैं जैसे गए तांत्रिक के पास । उसने कहा कि तुम्हारे बाप का ऐसा है,माँ का ऐसा है,हम ऐसे छुङा देंगे । दुनिया भर की फालतु की बातें और इसमे कई लोग उलझ जाते हैं और गलत लोगों के हाथ खेलते हैं ।
गुरू का मतलब आपसे ऊँचे उठे आदमी ।
गुरू का पहला गुण ये है कि वह आपके धन को ठोकरों पर रखता है,आप उसे बाँध नही सकते ,वह आपके आगे पीछे दौड़ने वाला नही है । ये सारा  ज्ञान सहजयोग मे कुण्डलिनी जागरण के बाद ही आता है ।
सहजयोग मे आने के बाद मनुष्य की चेतना जागृत हो  जाती है अंदर से परिवर्तन आना शुरू हो जाता है,असली और नकली की पहचान होने लगती है । 

सहजयोग मे सकारात्मक ऊर्जा से कैंसर को ठीक कर कर सकते हैं 
कोई भी अतिकर्मी आदमी है उसे कैंसर होता है ,कोई भी एक आदत का आदमी है तो उसे कैंसर हो सकता है । मंत्र देने से कैंसर होता है । गुरू तत्व खराब होने से 11 एकादश रूद्र जो हैं वो पकङ जाते हैं और इससे कैंसर की शुरुआत हो जाती है ।
पर सहजयोग मे आने के बाद मनुष्य समाधान को पाता है जब कुण्डलिनी का जागरण हो जाता है तब  श्रीगणेश के मंत्र से कैंसर को ठीक किया जा सकता है । गुरू तत्व भी ठीक हो जाता है ।

बच्चा कोई अगर पढने मे कमजोर है तो उसे ठीक कर सकते हैं 
बच्चा पढाई मे हार्ट चक्र के कारण कमजोर हो जाता है,जिन बच्चों के गले मे धागा या ताबीज़ होता है वे बच्चे डरपोक होते हैं,डिप्रेशन में होते हैं जिससे वे पढाई मे याद करा हुआ भूल जाते हैं ।
जिन बच्चों का मूलाधार चक्र खराब है तो उससे उनका चित्त बाहर की तरफ रहता है इससे भी बच्चा पढाई मे कमजोर होता है ।
सहजयोग मे स्पिरिचुअल पैथी  मे मध्य ह्रदय पर अपना दाँया हाथ रखकर दुर्गा का मंत्र या जय जगदम्ब 12 बार ले सकते हैं इससे बच्चे का पढाई मे भूलना बंद हो जाएगा और श्री गणेश के मंत्र से भी बच्चे का मूलाधार चक्र ठीक कर सकते हैं ।
सहजयोग मे किसी भी प्रकार के कर्मकांड, व्रत और उपवास, जप तप व शारीरिक व्यायाम की आवश्यकता नहीं है 
जप तप से,उपवास करने से अंहकार बढता है ,शारीरिक व्यायाम करने से अंहकार बढता है जिससे अनेकों शारीरिक बीमारियां हो जाती है। उपवास करने से परमात्मा नाराज हो जाते हैं क्योकि जिस दिन भगवान का जन्म हुआ उस दिन मनुष्य उपवास क्यों करता है इससे नाभि चक्र खराब हो जाता है। 
सहजयोग में नाभि चक्र को श्री आदिगुरूदत्तात्रेय जी के मंत्र से ठीक कर सकते हैं ।
संतोष इलाज है नाभि का ।
नाभि चक्र के ठीक होते ही मनुष्य मे समाधान भी आ जाता है